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बिहार का जनादेश

मनीष अस्थाना
बिहार विधानसभा के चुनाव में जिस तरह के परिणाम सामने आये उससे सभी पार्टियों को झटका जरुर लगा, कोकि इस तरह के परिणाम आयेंगे यह किसी को कतई उम्मीद नहीं थी इस बात को खुद नीतीश कुमार ने स्वीकार किया है बिहार के नेता लालू प्रसाद यादव ने खुद इन परिणामों को रहेस्य्मई बताया है उनके अनुसार इस तरह के परिणाम आना असंभव है । लालू प्रसाद को उम्मीद थी की उनकी सत्ता भले ही न आये लेकिन सीटें उनकी अवस्य अधिक आएगी लेकिन एसा कुछ नहीं हुआ , बिहार के मतदाताओं ने तो विधानसभा में ठीक तरह से विपक्चभी नहीं भेजा । इस बार के बिहार विधान सभा चुनाव में नीतीश कुमार को २०६ सीटें मिली बाकि सभी दलों को मुह की खानी पड़ी । चुनाव परिणाम आने के बाद सवाल यह उठता है की इतनी बड़ी सफलता आखिर नितीश को मिली कैसे तो इसका सीधा सा जवाब यही मना जायेगा की अब बिहार का मतदाता अपने प्रदेश का विकाश चाहता है पिछले पांच सालों मं नितीश कुमार ने जिस तरह से काम किया ओर वहां के लोगों को बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराईं उससे वहा का मतदाता संतुस्ट दिखाई दिया । बिहार के लोगों का कहेना था की इससे पहले यहाँ के दुसरे दलों के नेताओं ने विकाश के नाम पर कुछ नहीं किया था जिसका नतीजा उन्हें भुगतना पड़ा है ।
आज से कुछ सालों पहले बिहार में जंगल राज चलता था लोगों को रात तो दूर दिन में भी निकलना मुस्किल था महिलाओं की बात ही छोड़ दो कुछ साल पहेले तक बिहार का आपराधिक ग्राफ सबसे ऊपर हुआ करता था लेकिन प्रदेश में जबसे नीतीश की सरकार बनी वहां अपराधों की संख्या में कमी दर्ज की लूटपाट अपहरण तथा बलात्कार की संख्या में काफी हद तक कमी आयी इसके आलावा बिहार के लोगों को बुनियादी जैसे की बिजली पानी की सुविधा मिलने लगी लोगों को लगने लगा की बिहार की जो जरूरतें हैं यहाँ के लोगों की जो आशाएं है उन्हें नीतीश कुमार पूरा कर सकतें है इसके साथ ही लोगों ने अपने विस्वाश की मोहर नितीश के नाम पर लगा दी ।
बिहार के चुनाव में नीतीश के छवि भी खासी काम आयी जब दिल्ली में भ्रस्ताचार का मुद्दा गूंज रहा था ऐसे में नीतीश की बेदाग छवि लोगों को दिखाई दी । बिहार के लोगों ने लालू प्रसाद को भी अवसर दिया था लेकिन लालू की टीम ने बिहार का विकाश करने के बजाय अपना विकाश दिल खोलकर किया यहाँ तक की अपने परिवार व् रिश्तेदारों को भी जमकर मलाई खिलाई उसका परिणाम यह निकला के लालू को सत्ता से हाथ धोना पड़ा । लालू को उस समय लग रहा था की इस बार न सही तो क्या अगली वापस सत्ता में आयेगें लेकिन पांच साल बाद भी लालू को जोर का झटका लगा जिसके चलते लालू की सीटें बढ़ने के बजाय ओउर भी कम हो गयीं इसके साथ ही लालू के साथी राम विलाश पासवान का सफाया ही हो गया ।
इस बार बिहार में कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी व सोनिया गाँधी का जादू भी नहीं चला यहाँ तक की यह लोग अपनी पहले जितनी सीटें भी नहीं बचा पाय । बिहार के जनादेश से एक बात तो साफ हो गयी की आने वाले दिनों में जो चुनाव होगें वे विकाश के नाम पर ही होंगें जो लोगों का भला करेगा ओर प्रदेश का विकाश करेगा मतदाता उसका ही चयन करेगा अब जाती पाती व सम्प्रदाय के नाम पर चुनाव जीतना मुस्किल हो जायेगा , वास्तव में यदि आगे भी इसी तरह के चुनाव परिणाम आते रहें तो तो विकास होना कोई मुस्किल नहीं होगा .

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