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गठबंधन में दबाव की राजनीति

गठबंधन में दबाव की राजनीति आखिर कैसे होगा जनता का भला  मनीष अस्थाना   इन दिनों महाराष्ट्र में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के दबाव की राजनीति का खेल खेला जा रहा है , इन दोनों दलों का केंद्र और राज्य में गठबंधन हैं बावजूद इसके दोनों दल अधिक सीटों पर लड़ने के लिए एक दूसरे पर दबाव बनाने में जुटे हुए हैं। महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि उसे शिवसेना की तुलना में अधिक सीटें मिलें जबकि शिवसेना बराबरी के दर्जे पर गठबंधन करना चाह रही है इसलिए दोनों दलों के नेता एक दूसरे पर दबाव बनाने से बाज नहीं आतें है।  इन दिनों राजनीति के गलियारे में इस तरह की चर्चाएं चल रहीं हैं कि भाजपा शिवसेना को मात्र 106 विधानसभा सीटें गठबंधन के तहत देना चाहती है जबकि शिवसेना का कहना है कि आज से महीनों पहले आधे आधे के फार्मूले के आधार पर गठबंधन की बात हो चुकी है।  भाजपा शिवसेना पर दबाव बनाने के लिए ही एनसीपी और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को पार्टी में शामिल करने का काम किया जा रहा है हालांकि इसमें शिवसेना भी पीछे नहीं है वह पुरे जोश के साथ दिग्गजों को अपनी पार्टी में शामिल करने...

सिर्फ सत्ता सुख है नेताओं की विचारधारा

  सिर्फ सत्ता सुख ही है नेताओं की विचारधारा मनीष अस्थाना चुनाव आते ही राजनीतिक दलों में बड़ी उठापटक शुरू हो जाती है , बात जब सत्ता सुख की आती है तब हर नेता के समक्ष पार्टी की विचारधारा बौनी साबित हो जाती है। यह बात किसी एक नेता पर नहीं बल्कि देश के अधिकांश नेताओं पर लागू होती है। कुछ दिनों बाद महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं यहां पर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस भाजपा और शिवसेना में शामिल हो रहें हैं इसमें से कई लोग तो ऐसे है जो शिवसेना और भाजपा को दिन रात पानी पी - पी कर कोसते दिखाई देते थे , जो लोग कभी विचारों की दुहाई देते थे आज उन्ही लोगों को अपनी उसी विचारधारा का जहाज डूबता दिखाई देने लगा है ऐसे लोग अब उस जहाज की सवारी करना चाह रहें जो पानी की सतह से दो फ़ीट ऊँचा चलता दिखाई दे रहा है। यह लोग अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए किसी भी स्तर तक जाते हुए दिखाई दे रहें हैं।  यह बात सिर्फ महाराष्ट्र के नेताओं पर ही लागू नहीं होती है बल्कि उन राजनीतिक दलों पर भी लागू होती है जो मौका परस्ती के चलते सिर्फ अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं। अभी लोकसभा चुनाव ...