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अप्रैल, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

इस अमानवीय कृत्य की निंदा करना जरूरी है

इस अमानवीय कृत्य की निंदा करना जरूरी है  मनीष अस्थाना पालघर जिले में जिस तरह से भीड़ ने घेरकर दो संतों की हत्या कर दी उसकी निंदा करना जितना जरूरी है उससे भी अधिक ज्यादा जरूरी है दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देना , कड़ी सजा देना इसलिए भी जरूरी है ताकि भीड़ से निकलने वाले क्रूर और हिंसक मानसिकता रखने वालों की सोच पर विराम लगाया जा सके । पिछले कुछ सालों में मोबलिंचीग के मामले जिस तरीके से सामने आ रहें हैं वे चिंतनीय है । कुछ लोग भीड़ के हिंसात्मक चेहरे को सांप्रदायिक रंग देने में जुट जाते लेकिन ऐसे लोगों का कोई जाति या धर्म नहीं होता है । इसलिए इस तरह की घटनाओं की निंदा सभी धर्मों के बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा अवश्य की जानी चाहिए । लेकिन पालघर प्रकरण में ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है इसलिये संत समाज ने नाराजगी भी व्यक्त की है ।  इस पूरे प्रकरण में अभी तक 102 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और बाकी लोगों की तलाश की जा रही है , इस पूरे मामले की जांच सीआईडी द्वारा करायी जा रही है , पूरे प्रकरण में पुलिस के दो लोगों को निलंबित भी किया जा चुका है । यह मामला साम्प्रदायिक रंग न ले इसके...

भीड़ के अमानवीय चेहरों का जिम्मेदार कौन ?

भीड़ के अमानवीय चेहरों का जिम्मेदार कौन ? मनीष अस्थाना महाराष्ट्र के पालघर जिले में भीड़ में दिखाई दिया अमानवीय चेहरों को देश अभी पूरी तरह से भूल भी नहीं पाया था कि उत्तर प्रदेश के अलीगढ जिले में एक बार फिर भीड़ का अमानवीय चेहरा दिखाई दिया। पालघर या अलीगढ में  घटित हुआ वह कोई पहली घटना नहीं हैं इस तरह की घटनाएं अब तो आए दिन घटित होने लगी है । कोरोना महामारी के समय देश के कई हिस्सों से इस तरह की घटनाएं सामने आयीं है जिसमें पालफर की घटना को ह्र्दय विदारक जरूर कहा जा सकता है । जिसमें दो साधुओं को भीड़ ने निर्मम तरीके से हत्या कर दी । अक्सर कहा जाता है कि भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता है लेकिन भीड़ में जिस तरीके की घटनाएं घट रही है उसके बाद भीड़ के चेहरे को अमानवीय जरूर कहा जायेगा । ऐसी घटनाएं होने के बाद जो निष्कर्ष निकाला जाता है वह यही होता है भीड़ ने जो किया वह किसी अफवाह के तहत किया । पालघर में भी जो हुआ सरकार ने यही कहा कि जहाँ यह घटना घटी उस जगह बच्चा चोर गिरोह के सक्रिय होने की अफवाह फैली थी । इसके अलावा लॉक डाउन के दौरान भीड़ ने डॉक्टरों की टीम पर तथा पुलिस ब...

लॉक डाउन के बाद मुश्किलें और भी है

लॉक डाउन खुलने के बाद भी होगा गहरा संकट मनीष अस्थाना सरकार ने 3 मई तक लॉक डाउन की घोषणा की है साथ ही उन क्षेत्रों को कुछ राहत देने की बात कही है जहां कोरोना के संक्रमण कम है 20 अप्रैल के बाद ऐसे क्षेत्रों में बाजार खुलने की शुरुआत कर दी जाएगी । लेकिन सबसे बड़ी समस्या मुम्बई , दिल्ली जैसे महानगरों में रहने वाले मध्यम वर्गीय परिवारों को ही उठानी पड़ेगी क्योंकि बाजार या ऑफिस खुलते ही आर्थिक समस्या का समाधान नहीं होने वाला है । लॉक डाउन के दौरान कई छोटी कंपनियों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा जिसकी वजह से ऐसी कंपनियों में काम करने वाले लोग भी प्रभावित होंगे । कई लोग प्रोपराइटर शिप कंपनी बनाकर कई तरह के व्यवसायों से जुड़े होतें हैं इन लोगों की आय पर दो चार लोगों की जीविका निर्भर करती है जैसे कि कंसल्टिंग का कारोबार , छोटी विज्ञापन एजेंसी, छोटे प्रिंटिंग प्रेस इसके साथ ही कई तरह ऐसे ही छोटे व्यवसाय जिनके साथ जुड़कर लोग अपनी जीविका चलाते हैं कोरोना महामारी की मार की वजह से इनका व्यवसाय पूरी तरह से चौपट हो गया इस तरह का व्यवसाय करने वाले लोग हर महीने होने वाली आय से अपने साथ साथ अप...