सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

नवंबर, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कब तक चलेगा शिवसेना - बीजेपी में यह चूहे बिल्ली का खेल ?

कब तक चलेगा शिवसेना –बीजेपी में यह चूहे बिल्ली का खेल ? मनीष अस्थाना       इस बात को भले ही बीजेपी के नेता खुले मन से स्वीकार न करे लेकिन है एक दम सोलह आने सच कि जब से एनसीपी नेता शरद पवार ने महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार को इस बात का आभाष करा दिया है कि उसने जो सरकार का गठन किया है पहली बात तो यह अल्पमत की सरकार है और दूसरी बात उसकी बागडोर एनसीपी के पास तब से बीजेपी के नेता खासे परेशान है और लगातार इस बात के प्रयास करने में लगें हुये है कि किसी तरह शिवसेना मान जाय और महाराष्ट्र में उनकी सरकार बनी रहे । इसी लिए बीजेपी के नेताओं ने अपनी तरफ से यह कह कर शुरुआत की है कि महाराष्ट्र की जनता चाहती है कि शिवसेना सत्ता में भागीदार बने और वे जनता की इस इच्छा को पूरा करना चाहते है । लेकिन बीजेपी शिवसेना के बीच पिछले कुछ दिनों में जो बर्फ जम गयी है वह पिघलने का नाम ही नहीं ले रही है । शायद बीजेपी के नेता इस बात को समझ गए है अब इस बर्फ को पिघलाना आसान नहीं है इसके अलावा भाजपा नेताओं के बस की बात नहीं है । इसीलिए इस मामले में संघ के कुछ नेताओं को बीच बचाव के लिए लाया ...

आखिर सम्मान जनक भागीदारी का मतलब क्या है ?

आखिर सम्मान जनक भागीदारी का मतलब क्या है ? मनीष अस्थाना       इस बार जब से महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव हुये हैं तब से हर पार्टी के भीतर ‘ सम्मान जनक ’ शब्द का बड़ी तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है । चुनाव से पहले सभी दल अपने साथी दलों से सम्मान जनक विधान सभा सीटें मांग रहे थे और जब सभी दलों के नेताओं को लगने लगा कि उन्हे सम्मान जनक सीटें गठबंधन के तहत नहीं मिल रही है तो उन लोगों ने अपने साथी दलों से कट्टी कर ली और अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया । सम्मान जनक सीटे मांगने वालों में सभी दल शामिल थे , चाहे कांग्रेस हो या एनसीपी या फिर हो बीजेपी शिवसेना । महाराष्ट्र में चुनाव से पहले बीजेपी के साथ बड़े भाई के रूप में शिवसेना पेश आ रही थी और एनसीपी के साथ कांग्रेस । इन राजनीतिक दलों के बीच चुनाव से पूर्व कोई सम्मान जनक समझौता नहीं हुआ जिसकी वजह गठबंधन टूट गया ।       राज्य में चुनाव के बाद राजनीतिक तस्वीर एकदम बदल गयी लिहाजा जब परिणाम आए तो मतदाताओं ने बीजेपी को शिवसेना का बड़ा भाई बना दिया और एनसीपी को कांग्रेस का । यानि शिवसे...

क्या पवार के चक्र व्यूह में उलझ गई महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार

क्या पवार के चक्रव्युह में उलझ गयी महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ? मनीष अस्थाना       महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के साथ ही एनसीपी के मुखिया शरद पवार ने जिस तरह बीजेपी को बिना शर्त समर्थन देने की बात कही थी उससे इस प्रकार की चर्चा की जाने लगी थी कि 15 साल के भीतर एनसीपी के मंत्रियों ने जो घोटाले किए है उन लोगों को बचाने के लिए शरद पवार ने महाराष्ट्र में बीजेपी को अपना समर्थन देने की बात कह रहें है । उधर बीजेपी के नेता पवार के बिना शर्त समर्थन दिये जाने की वजह बीजेपी के कुछ नेता शिवसेना को लगातार राजनीतिक स्तर पर नीचा दिखाने   का प्रयास करने में लगे हुये थे । हालांकि एनसीपी के समर्थन को लेकर बीजेपी का कोई भी नेता बोलने के लिए न तब तैयार था और न ही अब कोई खुलकर बोल रहा है । लेकिन जिस दिन विधानसभा में बीजेपी को विश्वास मत हासिल करना था उस दिन कुछ नेता यह बोलते हुये जरूर दिखाई दिये कि हमने एनसीपी से समर्थन मांगा नहीं है लेकिन जब वे जबरन समर्थन दे रहे हैं तो इसके लिए भला हम क्या कर सकते हैं ?       जिस तरीके से...