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कब तक चलेगा शिवसेना - बीजेपी में यह चूहे बिल्ली का खेल ?


कब तक चलेगा शिवसेना –बीजेपी में यह चूहे बिल्ली का खेल ?

मनीष अस्थाना

      इस बात को भले ही बीजेपी के नेता खुले मन से स्वीकार न करे लेकिन है एक दम सोलह आने सच कि जब से एनसीपी नेता शरद पवार ने महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार को इस बात का आभाष करा दिया है कि उसने जो सरकार का गठन किया है पहली बात तो यह अल्पमत की सरकार है और दूसरी बात उसकी बागडोर एनसीपी के पास तब से बीजेपी के नेता खासे परेशान है और लगातार इस बात के प्रयास करने में लगें हुये है कि किसी तरह शिवसेना मान जाय और महाराष्ट्र में उनकी सरकार बनी रहे । इसी लिए बीजेपी के नेताओं ने अपनी तरफ से यह कह कर शुरुआत की है कि महाराष्ट्र की जनता चाहती है कि शिवसेना सत्ता में भागीदार बने और वे जनता की इस इच्छा को पूरा करना चाहते है । लेकिन बीजेपी शिवसेना के बीच पिछले कुछ दिनों में जो बर्फ जम गयी है वह पिघलने का नाम ही नहीं ले रही है । शायद बीजेपी के नेता इस बात को समझ गए है अब इस बर्फ को पिघलाना आसान नहीं है इसके अलावा भाजपा नेताओं के बस की बात नहीं है । इसीलिए इस मामले में संघ के कुछ नेताओं को बीच बचाव के लिए लाया गया है ।

      आरएसएस का मानना है कि शिवसेना कट्टर हिंदुवादी विचार धारा वाली पार्टी है और भाजपा नही हिन्दू विचारधारा से प्रेरित पार्टी है इसलिए इन दोनों पार्टियों के बीच अलगाव नहीं होना चाहिए । दोनों दलों में सत्ता में भागीदारी को लेकर विभागों के जो मतभेद है उन्हे दूर कर देना चाहिए । आरएसएस को लगता है कि यदि महाराष्ट्र में दोनों के बीच कोई सामंजस्य नहीं बनता है तो आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ेगा जिसका लाभ एनसीपी उठाने का प्रयास करेगी जो आरएसएस नहीं होने देना चाहता है । चुनाव के बाद सरकार गठन के समय जिस तरीके से बीजेपी ने एनसीपी की बैशाखी पकड़ी सोसल मीडिया पर उसकी जमकर फजीहत हुई । आने वाले दिनों में बीजेपी की फजीहत न हो इसके लिए बीजेपी ने तो नहीं लेकिन आरएसएस के नेताओं ने जरूर गंभीर रुख अपनाया है । इसी गंभीर रुख की वजह से ही केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान तथा महाराष्ट सरकार के मंत्री चन्द्रकान्त पाटील को शिवसेना के साथ बातचीत की ज़िम्मेदारी सौपी गयी । यह दोनों लोग आरएसएस से आए हुये नेता है । हालांकि इन दोनों की बातों का शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को कितना प्रभावित करेंगी इसका पता कुछ दिनों बाद चलेगा । लेकिन शुक्रवार की शाम को मातोश्री में हुई बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे पहले की तरह अड़े रहे और कहा कि जब तक उन्हे उप मुख्यमंत्री पद के अलावा कुछ महत्व पूर्ण विभाग नहीं दिये जाते है तब तक शिवसेना सत्ता में शामिल नहीं होगी ।

      उधर पिछले दिनों बीजेपी के नेता एकनाथ खड्से और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच जमकर वाक युद्ध हुआ ,इस वाक युद्ध ने शिवसेना को बीजेपी से दूर ले जाने का काम किया । विदर्भ के दौरे से वापस आए उद्धव ठाकरे ने राज्यपाल से मुलाक़ात की और वहाँ के हालत को अवगत कराते हुये खड्से इस्तीफे की मांग भी की । माना जा रहा है कि पहले शिवसेना और बीजेपी के बीच विभागो को लेकर सहमति नहीं बन पायी थी जो विभाग शिवसेना मांग रही थी बीजेपी उन विभागों को देने के लिए तैयार नहीं थी लेकिन अब शिवसेना खड्से का इस्तीफा भी मांगेगी क्योकि खड्से ने सीधे उद्धव ठाकरे से पंगा लिया है । इन सबके बीच उद्धव ठाकरे ने साफ साफ शब्दों में कहा है अब जो भी बात होगी वह मातोश्री पर होगी इसीलिए बीजेपी के दोनों नेताओं ने मातोश्री में जाकर बातचीत करने का निर्णय लिया । बीजेपी नेता शायद आज भी जनता में यह संदेश देने की कोशिश कर रहें है कि देखो हम तो अपनी तरफ से नर्म रुख अपनाए हुये है तल्ख तेवर शिवसेना ही अपना रही है । बीजेपी यह बताने का पूरा प्रयास कर रही है कि देखों हम चाहते है कि शिवसेना सत्ता में भागीदारी ले लेकिन शिवसेना आज भी शर्तों पर बात कर रही है ।

      पिछले कुछ दिनों में शिवसेना और बीजेपी के बीच जिस प्रकार का माहौल बना है और शिवसेना ने जिस तरीके से विपक्ष में बैठने का मन बनाया है उससे एक बात तो साफ है कि वह इतनी आसानी से मानने वाली नहीं है । बीजेपी लगातार इस बात का प्रयास कर रही है कि यदि किसी तरह शिवसेना शीतकालीन सत्र से पहले राजी हो जाती है तो बीजेपी को सदन में बिल पास कराने में आसानी होगी । यदि शिवसेना राजी नहीं होती है तो बीजेपी को एनसीपी पर निर्भर होना पड़ेगा जो बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व नहीं चाहता है । बीजेपी के केंद्रीय नेता नहीं चाहते है कि आने वाले दिनों में एनसीपी उन्हे ब्लेक मेल करे शायद इसी लिए बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने शिवसेना की तरफ हाथ बढ़ाया है । माना जा रहा है शिवसेना जनता का रुख पहचानने का प्रयास कर रही है कि यदि उसने सत्ता में शामिल होने का निर्णय ले लिया तो जनता में कही गलत संदेश न चला जाए ? माना जा रहा है जनता के रुख का अंदाजा लेने के लिए अभी कुछ दिनों और बीजेपी और शिवसेना के बीच चूहे बिल्ली का खेल चलता रहेगा । और इस खेल का अंत कब होगा इसका सटीक अंदाजा लगाना फिलहाल मुश्किल है ।

     

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