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महाधिवेसन के बहाने

मनीष अस्थाना
कुछ दिनों पहले कांग्रेस ने अपनी १२५ वें साल पुरे होने पर महाधिवेसन का आयोजन किया था , इस महाधिवेसन का आयोंजन दिल्ली में किया गया था । इस अधिवेसन के दोरान जहाँ एक तरफ कांग्रेसी नेताओं के चेहरों पर खुसी दिखाई दे रही तो दुसरी तरफ सीत सत्र के समय विरोधी दलों द्वरा लगाये गए भ्रस्टाचार के आरोपों के टीस भी दिखाई दे रही थी जिसे उनके चेहरों पर साफ पढ़ा जा सकता था, चाहे वह सोनिया गाँधी हो या फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हो या फिर कोई दूसरा नेता हो।
कांग्रेस के बड़े नेता इस बात को अच्छी तरह से जानते थे की इस सरकार के समय जो भ्रस्टाचार हुआ है उसकी वजह से पार्टी की छवि भी ख़राब हुई है जिसका असर पार्टी के कार्यकर्ताओं पर भी पड़ा है पार्टी ने अधिवेसन के दोरान उस छवि को भी सुधारने का प्रयास यह कह कर किया की उनकी पार्टी ने तो अपने नेताओं पर तो कार्यवाई की लेकिन बीजेपी ने अपने नेताओं पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की , इसका सीधा सा मतलब लगाया जा सकता है की अपने चहरे का दाग छिपाने के लिए यह दिखाना की देखो उसके चहरे पर भी तो दाग लगा है, पहले अपने चेहरे का दाग साफ करो फिर दुसरे का दाग दिखाओ । हलाकि कांग्रेसी नेताओं के इस कथन पर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने तो बजा दी लेकिन यह बात क्या आज का मतदाता हजम कर पायेगा जिसकी वजह से आज कांग्रेसी सत्ता का सुख भोग रहे हैं । एक तरफ जहाँ विरोधी दल इस भ्रस्टाचार के लिए पीएम को सीधा दोषी मान कर चल रहें है वहीं दूसरी तरफ कांग्रेसी अपने पीएम को पुरी तरह से पाक साफ मान कर लोगों के सामने अपना विचार रख रहें हैं ।
उधर विहार में कांग्रेस को हार का बुरी तरह से सामना करना पड़ा जिसकी उम्मीद तक नहीं की गयी थी हलाकि अधिवेसन के दोरान बिहार के कार्यकर्ताओं ने सीधे वहां के प्रभारी मुकुल वासनिक को जिम्मेदार मना और अपनी बात सोनिया गाँधी तक पहुचाने का प्रयास किया।
कांग्रेसी महाधिवेसन के समय जो जो मामले उठाये गए उससे एक बात तो साफ पता चलती है की पार्टी को यह लगने लगा है की आम कार्यकर्त्ता पार्टी से दूर होता जा रहा है जिसकी वजह है पार्टी के बड़े नेताओं द्वारा की जाने वाली उपेक्चा शायद इसीलिये राहुल गाँधी को यह कहना पड़ा की मंत्रियों को थोडा सा समय कार्यकर्ताओं को भी देना चाहिए ताकि आम कार्यकर्ता अपने आप को पार्टी से दूर महसूस न करें। हलाकि इस पर कितना अमल होता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा। अधिवेसन में इस बात का खुलासा जरुर हो गया की कांग्रेस अपने भविष्य को लेकर परेसान जरुर है। क्योकि कांग्रेस के कार्यकाल में हुए भ्रस्टाचार को मतदाता तो एक बार भुला भी सकता है लेकिन जिस तरह से महेगायीं ने आम लोगों की कमर तोड़ कर रख दी है उसे सायद ही भुला पाए ।

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