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शिवसेना की तल्खी को कम कर पायेगी बीजेपी


शिवसेना की तल्खी को खत्म कर पायेगी बीजेपी
लगातार निशाने पर हैं नरेंद्र मोदी
मनीष अस्थाना 
जहां एक तरफ शिवसेना से बीजेपी मित्रवत रिश्ता रखने का प्रयास में जुटी है वहीं दूसरी तरफ शिवसेना की तल्खी और अधिक बढ़ती जा रही है शिवसेना के निशाने पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होते है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करने में न तो पार्टी के नेता गुरेज करते है और न ही शिवसेना के मुखपत्र सामना उनकी आलोचना करने में कोई कमीं छोड़ता है , इसके बावजूद बीजेपी शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का सपना देख रही है । बीजेपी नेताओं यहां तक कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी कई बार यह कह चुके है कि बीजेपी शिवसेना एक साथ मिलकर लोकसभा व विधानसभा का चुनाव लड़ेगी ।
विपक्ष से अधिक शिवसेना करती आलोचना 
जब से केंद्र तथा महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तभी शिवसेना सरकार में शामिल होने के बावजूद सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना करती आई है मामला चाहे नोटबन्दी का हो या फिर मोदी के विदेश दौरे का या फिर कोई और मुद्दा हो विपक्ष की तरह शिवसेना भाजपा को आड़े हाथों लेती रही है । महाराष्ट्र में शिवसेना सरकार में शामिल है लेकिन बीजेपी के अधिकतर निर्णयों पर शिवसेना विरोधी तेवर ही देखने को मिले हैं । केंद्र सरकार ने कोंकण के राजापुर म् रिफाइनरी लगाने का खुलकर विरोध किया है , शिवसेना का कहना है वे सरकार के ऐसे किसी भी निर्णय में शामिल नहीं होंगे जो जन विरोधी होंगे । शिवसेना तथा बीजपी के नेताओं के बीच कभी कभी तू तू मैं मैं भी होती रहती है कई बार बीजेपी के लोग यह भी कहते रहें है कि शिवसेना सरकार से अपना समर्थन वापस ले ले लेकिन शिवसेना सत्ता से दूर नही जाना चाहती है ।
सरकार में दीमक का काम कर रही है शिवसेना
शिवसेना सरकार में रहकर दीमक बनकर काम करने का प्रयास कर रही है , शिवसेना की शायद यह सोच होगी कि यदि भाजपा को खोखला करना है तो उसके साथ दीमक की तरह चिपककर रहना होगा । शिवसेना इस बात को भी अच्छी तरह जानती है कि यदि उसने सरकार से समर्थन वापस ले लिया तो भाजपा एनसीपी की गोद मे जाकर बैठ सकती है क्योंकि शरद पवार कब कौन सा कदम उठा ले यह नही कहा जा सकता है शायद इसीलिए तमाम मतभेद तथा मनभेद के बीच भी शिवसेना बीजेपी को ढोने का काम बेमन से करती जा रही है लेकिन शिवसेना अपने तल्ख तेवरों में कोई कमीं नहीं ला रही है ।
शिवसेना को मनाने का दौर शुरू
आने वाले 2019 के लोकसभा तथा विधानसभा के चुनाव शिवसेना भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़े इसके लिए भाजपा ने अभी से शिवसेना को मनाने का काम शुरू कर दिया है । भाजपा को यह बात अच्छी तरह से पता है कि 2019 में जिस तरह के चुनावी समीकरण बनने के आसार दिखायी दे रहे है उससे तो एक बात साफ है कि अकेले के दम पर बीजेपी न तो लोकसभा में अधिक सीटें निकाल पाएगी और न ही महाराष्ट्र में सरकार ही बना पाएगी इसीलिए समान विचारधारा के नाम पर एक साथ चुनाव लड़ने की बात कही जाने लगी है लेकिन भाजपा नेताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे शिवसेना के तल्ख तेवर को कैसे कम कर इसके अलावा वे ऐसा क्या करे जिससे शिवसेना मोदी पर हमला करना बंद कर दे ताकि भविष्य में होने वाले राजनीतिक नुकसान को रोका जा सके ।

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