सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कमजोर संगठन और अनुशासन के अभाव के बीच कैसे उभर पाएगी कांग्रेस



मनीष अस्थाना
पिछले दिनों कांग्रेस ने जन आक्रोश रैली निकालकर भाजपा को चेतावनी देने का काम किया है । जनाक्रोश रैली के माध्यम से कांग्रेस ने उन सभी मुद्दों को उभारने का काम किया है जो आम आदमी से लेकर खास आदमी के बीच चर्चा किये जाते रहें हैं । लोगों की उन तमाम समस्याओं को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी , पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रैली में उठाने का भरसक प्रयास किया । रैली को संबोधित करते हुए जिस तरीके राहुल गांधी ने कहा कि कुछ समय बाद मध्य प्रदेश , राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ में होने वाले चुनाव में कांग्रेस को सफलता जरूर मिलेगी । लेकिन सवाल उठता है कि कांग्रेस के पास चुनाव जीतने के लिए कार्य कर्ताओं की बेहद कमीं है , पार्टी के प्रति समर्पित होकर काम करने वालों की संख्या कम हो चुकी है । चुनावों में पार्टी को जिताने के लिए संगठन को मजबूत करना बेहद जरूरी है इस बात को कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल ग़ांधी भली भांति जानते भी है । राहुल गांधी लगातार इस बात के प्रयास कर रहें हैं किसी भी तरह से पार्टी और संगठन को मजबूत किया जाय लेकिन पार्टी को जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का अभाव महसूस हो रहा है , कांग्रेस पार्टी में पिछले कुव्ह अरसे से कार्य कर्ताओं की तुलना में नेताओं की संख्या अधिक है और यह नेता सिर्फ हवा हवाई बातें करना जानते है जमीनी स्तर पर काम करना नहीं चाहते है , ऐसे नेताओं की सोच है कि बिना ज़मीन पर काम किये ही सत्ता उनके हाथ में आ जायेगी लेकिन अब ऐसा होने वाला नही है । पार्टी के कार्यकर्ता काफी अर्से से अपने आप को उपेक्षित महसूस करते आये है उन्हें इस बात का भरोसा दिलाना होगा कि अब से कार्यकर्ताओं को उतनी ही तरजीह दी जाएगी जितनी किसी बड़े नेता को दी जाती है और यह भरोसा स्वयं राहुल गांधी को देना होगा क्योंकि कार्यकर्ताओं को उपेक्षित करने का आरोप राहुल गांधी पर भी लगाएं जा चुके हैं । शायद इसीलिए 
राहुल गांधी ने जब से कांग्रेस पार्टी की बागडोर संभाली है तब से लेकर आज तक कांग्रेस को कई राज्यों में हार का सामना करना पड़ा है ।
अभी तक के चुनावों में राहुल गांधी की रही है अहम भूमिका
2014 के बाद जितने भी राज्यों में चुनाव हुए उन सभी में प्रत्याशियों के चयन से लेकर चुनावी रणनीति बनाने तक में राहुल गांधी की अहम भूमिका रही है , राहुल गांधी के करीबियों ने जिन जिन लोगों को टिकट देने के लिए कहा उन सभी को टिकट दिये गए । टिकट बटवारें में कई राज्यों में कई लोगों ने पैसे लेने के आरोप भी लगाए गए थे जिसकी शिकायत राहुल गांधी से भी की गई थी , जिन लोगों पर आरोप लगाए गए थे जब उन लोगों पर किसी प्रकार की कोई करवाई हाईकमान द्वारा नही की गई तो बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया हालांकि इस तरह के वाकये किसी एक राज्य में नहीं बल्कि कई राज्यों में हुए जिसकी वजह से पार्टी कमजोर होती चली गयी । हालांकि पिछले कई सालों से बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने पार्टी से दूरी बना ली , पार्टी से दूर हुए कार्यकर्ताओं को फिर से करीब लाने में किसी भी कांग्रेसी नेता ने दिलचस्पी नही दिखाई ।
राहुल गांधी पर भी कार्यकर्ताओं को उपेक्षित करने का आरोप
जिस समय पार्टी में प्रमुख महासचिव की भूमिका में राहुल गांधी थे उस समय कार्यकर्ता अक्सर इस बात की शिकायत करते थे कि राहुल गांधी कार्यकर्ताओं से मिलने में कोई दिलचस्पी नही रखते है तमाम कोशिशों के बाद यदि मिलने का समय मिल भी जाता था तो वे सेकेंडों में ही उसकी बात सुनकर उसे चलता कर दिया करते थे इस वजह से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने पार्टी से दूरी बना ली जिसका परिणाम यह हुआ आज कांग्रेस के पास समर्पित कार्यकर्ताओं की कमीं दिखाई दे रही है राहुल गांधी मंच से बाले ही कांग्रेस पार्टी के युवाओं को आगे लाने की बात कहते हो लेकिन हकीकत यह भी है पिछले कई सालों में युवा कांग्रेस के साथ जुड़ा ही नही है ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर भले ही युवाओं को जिम्मेदारी दी दी जाय लेकिन जिला स्तर पर युवा कार्यकर्ताओं की कमीं जरूर महसूस की जाएगी क्योंकि एक लंबे अरसे युवाओं को पार्टी से जोड़ने का काम ही नहीं हुआ और जो हुआ भी है वह सिर्फ कागजों पर ही हुआ है ।


टिप्पणियाँ