सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जिन्ना का जिन्न मचा रहा उत्पात


जिन्ना का जिन्न फिर मचा रहा है उत्पात
जिन्ना की विचारधारा वाले नहीं हो सकते हैं राष्ट्रभक्त
मनीष अस्थाना
आजादी के बाद जिस तरीके से मोहम्मद अली जिन्ना ने भारत के विभाजन में महत्वपूर्ण किरदार निभाते हुए भारत का विभाजन कराया था उस इतिहास को हिंदुस्तान कभी नहीं भूल सकता है । मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान की नींव लाखों निर्दोष लोगों की लाशों पर रखी थी । आजादी के बाद जिन्न एक बार फिर आजाद हिंदुस्तान की सड़कों पर खुले आम उत्पात मचा रहा है । यह मामला है अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का यहां पर जिन्ना की तस्वीर लगी हुई है , जिन्ना की यह तस्वीर यहां क्यूँ लगाई गई है इस बारे वहां के सांसद ने कुलपति को एक पत्र लिखा था उन्होंने पत्र में जिन्ना की तस्वीर को हटाने की मांग भी की । विश्वविद्यालय से तस्वीर हटाई जाय इसके लिए हिन्दू युवा वाहिनी ने आंदोलन छेड़ रखा है जिसकी वजह से हिन्दू युवा वाहिनी के सदस्यों तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र संघ के तीखी झड़प हुई इसके अलीगढ़ में इतना अधिक तनाव बढ़ गया कि पुलिस के अलावा रैपिड एक्सन फोर्स तक मांगनी पड़ी । इसके साथ ही राजनीतिक हलकों से लेकर आम आदमी तक के बीच जिन्ना की तस्वीर को लेकर जोरदार बहस छिड़ गयी ।
सीधी से बात है जिन्ना ने आजादी मिलने के बाद जो अलगाव का काम किया उसे राष्ट्र पुरुष कस दर्ज तो दूर की बात उनका नाम भी सम्मानित तरीके से लिया जाय वे इसके भी लायक नहीं है । जिन्ना ने आजादी की लड़ाई में जो भी भूमिका अदा की हो उसकी कीमत उन्होंने पाकिस्तान के रूप में ले ली । हिंदुस्तान पाकिस्तान बटवारे के बाद भी जिन्नावादी सोच बची रह गयी जिसका खामियाजा अलीगढ़ की सड़कों पर देखने को मिला , अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले मुस्लिम युवा जिन्नावादी विचारधारा से प्रभावित दिखाई दे रहें है , वहां पढ़ने वाले मुस्लिम युवा छात्र जिन्ना के लिए अपने ही देश मे लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं । 
जिन्ना को लेकर देश की राजनीति भी गरमा रही है , भारतीय जनता पार्टी ने साफ तौर पर कहा है कि वे किसी भी कीमत पर जिन्ना की तस्वीर लगाने के पक्ष में नहीं है वहीं बीजेपी के ही विधायक केशव प्रसाद मौर्या ने जिन्ना की तस्वीर लगाने के पक्ष में बात की है । कांग्रेस में जिन्ना को लेकर नेताओं में मतभेद है हालांकि जिस तरीके से भाजपा ने जिन्ना के प्रति अपनी पार्टी लाइन सबको बता दी है लेकिन कांग्रेस ने कोई पार्टी की लाइन तय नहीं की है कि जिन्ना की तस्वीर को लेकर कांग्रेस का क्या राय है इसीलिए कांग्रेस का हर नेता अपने अपने नजरिये से बात करता हुआ दिखाई दे रहा है । जिन्ना की तस्वीर को लेकर कई मुस्लिम नेताओं ने भी अपनी अपनी राय व्यक्त की है जिसमें जिन्ना की तस्वीर लगाने का विरोध किया है ।
देश की जनता भी नहीं चाहती है कि जिस जिन्ना ने भारत के विभाजन में प्रमुख भूमिका अदा की हो उस व्यक्ति की तस्वीर देश के अन्य महापुरुषों के साथ लगाई जाय इस बात को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उन छात्रों को भी समझना चाहिए कि देश का विभाजन करने वाले व्यक्ति को किसी प्रकार का कोई सम्मान नहीं देना चाहिए । जिन्ना ने आजादी की लड़ाई में चाहे जो भूमिका अदा की हो लेकिन जिस दिन से उन्होंने अलग पाकिस्तान लिया उसके बाद से वे हिंदुस्तान में सम्मान के कोई पात्र नहीं है और जो लोग आज भी जिन्ना की विचारधारा से प्रभावित है उनकी तस्वीर लगाने के समर्थन में खड़े हुए ऐसे लोग देश की एकता और अखंडता के घातक साबित हो सकते हैं ।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

महाधिवेसन के बहाने

मनीष अस्थाना कुछ दिनों पहले कांग्रेस ने अपनी १२५ वें साल पुरे होने पर महाधिवेसन का आयोजन किया था , इस महाधिवेसन का आयोंजन दिल्ली में किया गया था । इस अधिवेसन के दोरान जहाँ एक तरफ कांग्रेसी नेताओं के चेहरों पर खुसी दिखाई दे रही तो दुसरी तरफ सीत सत्र के समय विरोधी दलों द्वरा लगाये गए भ्रस्टाचार के आरोपों के टीस भी दिखाई दे रही थी जिसे उनके चेहरों पर साफ पढ़ा जा सकता था, चाहे वह सोनिया गाँधी हो या फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हो या फिर कोई दूसरा नेता हो। कांग्रेस के बड़े नेता इस बात को अच्छी तरह से जानते थे की इस सरकार के समय जो भ्रस्टाचार हुआ है उसकी वजह से पार्टी की छवि भी ख़राब हुई है जिसका असर पार्टी के कार्यकर्ताओं पर भी पड़ा है पार्टी ने अधिवेसन के दोरान उस छवि को भी सुधारने का प्रयास यह कह कर किया की उनकी पार्टी ने तो अपने नेताओं पर तो कार्यवाई की लेकिन बीजेपी ने अपने नेताओं पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की , इसका सीधा सा मतलब लगाया जा सकता है की अपने चहरे का दाग छिपाने के लिए यह दिखाना की देखो उसके चहरे पर भी तो दाग लगा है, पहले अपने चेहरे का दाग साफ करो फिर दुसरे का दाग दिख...

भीड़ के अमानवीय चेहरों का जिम्मेदार कौन ?

भीड़ के अमानवीय चेहरों का जिम्मेदार कौन ? मनीष अस्थाना महाराष्ट्र के पालघर जिले में भीड़ में दिखाई दिया अमानवीय चेहरों को देश अभी पूरी तरह से भूल भी नहीं पाया था कि उत्तर प्रदेश के अलीगढ जिले में एक बार फिर भीड़ का अमानवीय चेहरा दिखाई दिया। पालघर या अलीगढ में  घटित हुआ वह कोई पहली घटना नहीं हैं इस तरह की घटनाएं अब तो आए दिन घटित होने लगी है । कोरोना महामारी के समय देश के कई हिस्सों से इस तरह की घटनाएं सामने आयीं है जिसमें पालफर की घटना को ह्र्दय विदारक जरूर कहा जा सकता है । जिसमें दो साधुओं को भीड़ ने निर्मम तरीके से हत्या कर दी । अक्सर कहा जाता है कि भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता है लेकिन भीड़ में जिस तरीके की घटनाएं घट रही है उसके बाद भीड़ के चेहरे को अमानवीय जरूर कहा जायेगा । ऐसी घटनाएं होने के बाद जो निष्कर्ष निकाला जाता है वह यही होता है भीड़ ने जो किया वह किसी अफवाह के तहत किया । पालघर में भी जो हुआ सरकार ने यही कहा कि जहाँ यह घटना घटी उस जगह बच्चा चोर गिरोह के सक्रिय होने की अफवाह फैली थी । इसके अलावा लॉक डाउन के दौरान भीड़ ने डॉक्टरों की टीम पर तथा पुलिस ब...

सिर्फ सत्ता सुख है नेताओं की विचारधारा

  सिर्फ सत्ता सुख ही है नेताओं की विचारधारा मनीष अस्थाना चुनाव आते ही राजनीतिक दलों में बड़ी उठापटक शुरू हो जाती है , बात जब सत्ता सुख की आती है तब हर नेता के समक्ष पार्टी की विचारधारा बौनी साबित हो जाती है। यह बात किसी एक नेता पर नहीं बल्कि देश के अधिकांश नेताओं पर लागू होती है। कुछ दिनों बाद महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं यहां पर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस भाजपा और शिवसेना में शामिल हो रहें हैं इसमें से कई लोग तो ऐसे है जो शिवसेना और भाजपा को दिन रात पानी पी - पी कर कोसते दिखाई देते थे , जो लोग कभी विचारों की दुहाई देते थे आज उन्ही लोगों को अपनी उसी विचारधारा का जहाज डूबता दिखाई देने लगा है ऐसे लोग अब उस जहाज की सवारी करना चाह रहें जो पानी की सतह से दो फ़ीट ऊँचा चलता दिखाई दे रहा है। यह लोग अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए किसी भी स्तर तक जाते हुए दिखाई दे रहें हैं।  यह बात सिर्फ महाराष्ट्र के नेताओं पर ही लागू नहीं होती है बल्कि उन राजनीतिक दलों पर भी लागू होती है जो मौका परस्ती के चलते सिर्फ अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं। अभी लोकसभा चुनाव ...