किसी को भी नहीं मिला पूर्ण बहुमत
मनीष अस्थाना
मंगलवार के दिन कर्नाटक चुनाव के परिणाम घोषित हो गए , लेकिन यह चुनाव परिणाम किसी भी राजनीतिक दल की उम्मीदों पर खरे साबित नहीं हुए चुनाव परिणाम आने से पहले भाजपा को पूरी उम्मीद थी कि उसे 120 के आसपास सीटें मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ भाजपा की सीटें बढ़ीं तो जरूर लेकिन बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर पायी भाजपा यहां पर 104 सीटें ही हासिल कर पाई इसी तरह कर्नाटक में कांग्रेस का दावा भी खोखला ही साबित हुआ वह अपनी सरकार तक नहीं बचा पायी कांग्रेस मात्र 78 सीटों पर ही सिमट कर रह गयी । जैसा कि राजनीतिक जानकारों का अनुमान था कि यहां पर जेडीएस सरकार बनाने के लिए किंग मेकर की भूमिका में आ सकता है और वही हुआ भी , कर्नाटक में जेडीएस को किंग की भूमिका में आने का मसुक मिला । चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि यदि भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला तो वह जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बना लेगी लेकिन चुनाव परिणामों के बीच में ही कांग्रेस ने एक ऐसा कार्ड खेला जिसकी उम्मीद कम की जा रही थी , कांग्रेस ने जेडीएस नेताओं से मिलकर कहा कि वे सरकार बनाये कांग्रेस उनका बिना शर्त समर्थन करेगी जिसके बाद जेडीएस नेता कुमारस्वामी ने राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया इसके बाद भाजपा नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात की और कहा कि वे कर्नाटक में सबसे बड़े दाल के रूप में सामने आये हैं इसलिए सरकार बनाने के लिए सबसे पहले उन्हें ही मौका दिया जाना चाहिए ।
चूंकि कर्नाटक के राज्यपाल आर एस एस की पृष्ठभूमि से है इसीलिए लोगों को लग रहा है कि वे सबसे पहले सरकार गठन करने का मौका भाजपा को ही देंगे हालांकि इस संभावना पर कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो राज्यपाल के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी । बहुमत नहीं होने के बावजूद भाजपा नेता यह दावा कसरते हुए दिखाई दे रहें है कि कर्नाटक में भाजपा ही सरकार बनाएगी जिसका सीधा सा मतलब है कि भाजपा जेडीएस या कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने का काम करेगी ।
भाजपा नेता यह भी दावा कर रहें है कि वे कर्नाटक को स्थायी सरकार देना चाहते है और कर्नाटक के विकास करना चाहते है लेकिन यदि राज्य में जेडीएस और कांग्रेस मिलकर राज्य में सरकार बनाते है तो राज्य को स्थायी सरकार नहीं मिल पाएगी और न ही राज्य का विकास हो पाएगा ।
हालांकि देखा जाय तो यह बात सच है कि कांग्रेस ने सिर्फ भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए ही जेडीएस को बिना शर्त समर्थन देने की बात कही है जबकि हकीकत में सत्ता की चाबी कांग्रेस के पास ही रहेगी और ऐसी सरकारें अधिक दिनों तक टिक नहीं पाती है हिंदुस्तान में इस तरह के कई उदाहरण है जिनमें सरकारों को स्थायित्व नहीं मिला है , ऐसी सरकारें बीच में ही गिर चुकीं हैं ।
कर्नाटक में भाजपा को बहुमत भले ही न मिला हो लेकिन सीटें अधिक जरूर मिली है भले ही मतों का प्रतिशत कम हो वैसे भी भारत में सरकार बनाने के लिए सीटों की संख्या देखी जाती है न कि मतों का प्रतिशत । इसलिए भाजपा खुश हो रही है कि दक्षिण भारत में भी उसकी रणनीति काम कर रही है , मोदी - शाह की रणनीति ने जिस तरह से भाजपा को उत्तर भारत में सफलता मिली उसी तरह दक्षिण भारत में भी सफलता मिल रही है । भाजपा नेताओं का मानना है कि कर्नाटक में भले ही वे पूर्ण बहुमत हासिल न कर पाएं हो लेकिन जो आंकड़ा है वह बहुमत से इतना दूर भी नहीं है जिसे हासिल न किया जा सके । भजपा नेता इस बात को मानकर चल रहे है कि कर्नाटक के चुनाव परिणाम का लाभ राजस्थान , मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में भी मिलेगा । इन तीनों राज्यों में भी यदि भाजपा एक बार सरकार बनाने में कामयाब हो जाती है तो काफी हद तक उनका मिशन 2019 पूरा हो जाएगा । मिशन 2019 में लगातार सफलता के बाद कार्यकर्ता पूरे जोश के साथ काम करेगा जिसका लाभ एक बार भाजपा को मिलेगा ।

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