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सिर्फ सत्ता सुख है नेताओं की विचारधारा

  सिर्फ सत्ता सुख ही है नेताओं की विचारधारा मनीष अस्थाना चुनाव आते ही राजनीतिक दलों में बड़ी उठापटक शुरू हो जाती है , बात जब सत्ता सुख की आती है तब हर नेता के समक्ष पार्टी की विचारधारा बौनी साबित हो जाती है। यह बात किसी एक नेता पर नहीं बल्कि देश के अधिकांश नेताओं पर लागू होती है। कुछ दिनों बाद महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं यहां पर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस भाजपा और शिवसेना में शामिल हो रहें हैं इसमें से कई लोग तो ऐसे है जो शिवसेना और भाजपा को दिन रात पानी पी - पी कर कोसते दिखाई देते थे , जो लोग कभी विचारों की दुहाई देते थे आज उन्ही लोगों को अपनी उसी विचारधारा का जहाज डूबता दिखाई देने लगा है ऐसे लोग अब उस जहाज की सवारी करना चाह रहें जो पानी की सतह से दो फ़ीट ऊँचा चलता दिखाई दे रहा है। यह लोग अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए किसी भी स्तर तक जाते हुए दिखाई दे रहें हैं।  यह बात सिर्फ महाराष्ट्र के नेताओं पर ही लागू नहीं होती है बल्कि उन राजनीतिक दलों पर भी लागू होती है जो मौका परस्ती के चलते सिर्फ अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं। अभी लोकसभा चुनाव ...

हिंसक आरक्षण आंदोलन का जिम्मेदार कौन ? क्या आरक्षण से सुलझ जाएगी बेकारी की समस्या

मनीष अस्थाना पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र में आरक्षण का मुद्दा मराठा समाज मे सिर चढ़कर बोल रहा है , मराठा समाज ने इसके लिए हिंसा का रास्ता भी अख्तियार किया जो आज भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है । पिछले दिनों हुई हिंसा में सरकारी और निजी संपत्ति को जमकर नुकसान पहुचाने का काम किया गया । आंदोलन कोई भी हो लोगों की मांगें कितनी भी गंभीर क्यों न हो हिंसा के रास्ते को कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता है । महाराष्ट्र में पिछले दिनों जिस तरह से हिंसक आंदोलन हुआ उसके लिए हकीकत में जिम्मेदार कौन है यह सबसे बड़ा सवाल है ? मात्र आंदोलन खत्म होने से ही चिंता खत्म नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह मामला सिर्फ आंदोलन तक ही नहीं सीमित है इस आंदोलन से युवाओं की हिंसक मानसिकता भी उजागर हुई है जो सरकार और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है । इस आंदोलन में एक बात साफ साफ उजागर हुई है कि अपनी मांग को मनवाने के लिए आज का युवा किसी भी हद तक जा सकता युवा चाहे महाराष्ट्र के हो या फिर कश्मीर के या फिर किसी दूसरे राज्य के ही क्यों न हो सुरक्षा बलों से टकराने में उन्हें कोई गुरेज नहीं और न ही उसके परिणामों से । कश्मीर के य...

आखिर क्या है कर्नाटक चुनाव परिणाम के मायने ?

किसी को भी नहीं मिला पूर्ण बहुमत मनीष अस्थाना मंगलवार के दिन कर्नाटक चुनाव के परिणाम घोषित हो गए , लेकिन यह चुनाव परिणाम किसी भी राजनीतिक दल की उम्मीदों पर खरे साबित नहीं हुए चुनाव परिणाम आने से पहले भाजपा को पूरी उम्मीद थी कि उसे 120 के आसपास सीटें मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ भाजपा की सीटें बढ़ीं तो जरूर लेकिन बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर पायी भाजपा यहां पर 104 सीटें ही हासिल कर पाई इसी तरह कर्नाटक में कांग्रेस का दावा भी खोखला ही साबित हुआ वह अपनी सरकार तक नहीं बचा पायी कांग्रेस मात्र 78 सीटों पर ही सिमट कर रह गयी । जैसा कि राजनीतिक जानकारों का अनुमान था कि यहां पर जेडीएस सरकार बनाने के लिए किंग मेकर की भूमिका में आ सकता है और वही हुआ भी , कर्नाटक में जेडीएस को किंग की भूमिका में आने का मसुक मिला । चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि यदि भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला तो वह जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बना लेगी लेकिन चुनाव परिणामों के बीच में ही कांग्रेस ने एक ऐसा कार्ड खेला जिसकी उम्मीद कम की जा रही थी , कांग्रेस ने जेडीएस नेताओं से मिलकर कहा कि वे सरकार...

पेट्रोल होगा सौ के पार देेश में बनेगी फिर मोदी सरकार

                   मनीष अस्थाना नरेंद्र मोदी सरकार इस बात को मानकर चल रही है कि वह जो भी काम कर रही है वह कांग्रेस सरकार से बेहतर है , लेकिन मोदी सरकार क्या कर रही है जो कांग्रेस सरकार से बेहतर है यह बात जनता को समझ में नहीं आ रही है ? देश की जनता इस बात को नहीं समझ पा रही है कि मोदी सरकार आखिर ऐसा कौन सा विकास काम कर रही है जिसकी वजह से आर्थिक हालात खराब होते जा रहे है , देश का हर कारोबार मंदी की चपेट में है , देश के व्यापारी यह सोचकर परेशान हो रहें है कि मोदी सरकार द्वारा विकास करने के वावजूद उनका व्यापार बढ़ क्यों नहीं रहा है ? मोदी सरकार ने चार साल पूरे कर लिए इन चार सालों देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग सभी देशों की यात्राएं कर चुके हैं , देश का युवा वर्ग को यह बात समझ में नहीं आ रही है कि मोदी भारत मे करोड़ो अरबों के निवेश पर समझौता कर चुके है लेकिन फिर भी युवाओं के लिए नए रोजगार उपलब्ध क्यों नहीं हो रहें हैं । देश का हर व्यापारी अब यह कहते हुए दिखाई देने लगा है आज से 15 साल पहले जब उसने कारोबार शुरू किया था उसके बाद...

जिन्ना का जिन्न मचा रहा उत्पात

जिन्ना का जिन्न फिर मचा रहा है उत्पात जिन्ना की विचारधारा वाले नहीं हो सकते हैं राष्ट्रभक्त मनीष अस्थाना आजादी के बाद जिस तरीके से मोहम्मद अली जिन्ना ने भारत के विभाजन में महत्वपूर्ण किरदार निभाते हुए भारत का विभाजन कराया था उस इतिहास को हिंदुस्तान कभी नहीं भूल सकता है । मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान की नींव लाखों निर्दोष लोगों की लाशों पर रखी थी । आजादी के बाद जिन्न एक बार फिर आजाद हिंदुस्तान की सड़कों पर खुले आम उत्पात मचा रहा है । यह मामला है अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का यहां पर जिन्ना की तस्वीर लगी हुई है , जिन्ना की यह तस्वीर यहां क्यूँ लगाई गई है इस बारे वहां के सांसद ने कुलपति को एक पत्र लिखा था उन्होंने पत्र में जिन्ना की तस्वीर को हटाने की मांग भी की । विश्वविद्यालय से तस्वीर हटाई जाय इसके लिए हिन्दू युवा वाहिनी ने आंदोलन छेड़ रखा है जिसकी वजह से हिन्दू युवा वाहिनी के सदस्यों तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र संघ के तीखी झड़प हुई इसके अलीगढ़ में इतना अधिक तनाव बढ़ गया कि पुलिस के अलावा रैपिड एक्सन फोर्स तक मांगनी पड़ी । इसके साथ ही राजनीतिक हलकों से लेकर...

दलित अब कहाँ रहे अछूत

दलित अब अछूत कहाँ रहें सिर्फ वोट बैंक के लिए हो रही है राजनीति मनीष अस्थाना देश मे जो लोग वोट बैंक पक्का करने के लिए दलित के नाम की राजनीति कर रहें है उन्हें यह बात समझ लेना चाहिए कि दलित अब अछूत नहीं रहें एक समय था जब सवर्ण लोग दलितों को अछूत मानते थे और उनके यहां पानी पीने तक नहीं पीते थे लेकिन अब ऐसा नही है दलित और सवर्ण एक साथ काम करते है और एक मेज पर बैठकर खाना भी कहते है हां देश के नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए दलित समाज को बाकी के लोगों से अलग कर रखा है दलित समाज के जो लोग पिछड़े हैं और गरीब भी है जो इन नेताओं की राजनीति नहीं समझते हैं उनके मन मे जहर घोलने का काम करते रहते है उन्हें लगातार इस बात का आभाष दिलाते रहतें है कि वे एक समाज का हिस्सा है जिसे पिछड़ा माना जाता है वे बाकी से अलग है । दलित समाज के मन मे सबसे अधिक जहर घोलने का काम दलित नेता ही करते है । अपने आप को दलित समाज का हितैषी कहने वाली मायावती ने दलित मतदाताओं के बल पर सत्ता के शीर्ष पर पहुंच गई वे उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री भी बनी लेकिन गरीब दलितों का उत्थान नहीं कर पाई । आज जिस तरीके अमीर और गरीब सवर...