सिर्फ सत्ता सुख ही है नेताओं की विचारधारा मनीष अस्थाना चुनाव आते ही राजनीतिक दलों में बड़ी उठापटक शुरू हो जाती है , बात जब सत्ता सुख की आती है तब हर नेता के समक्ष पार्टी की विचारधारा बौनी साबित हो जाती है। यह बात किसी एक नेता पर नहीं बल्कि देश के अधिकांश नेताओं पर लागू होती है। कुछ दिनों बाद महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं यहां पर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस भाजपा और शिवसेना में शामिल हो रहें हैं इसमें से कई लोग तो ऐसे है जो शिवसेना और भाजपा को दिन रात पानी पी - पी कर कोसते दिखाई देते थे , जो लोग कभी विचारों की दुहाई देते थे आज उन्ही लोगों को अपनी उसी विचारधारा का जहाज डूबता दिखाई देने लगा है ऐसे लोग अब उस जहाज की सवारी करना चाह रहें जो पानी की सतह से दो फ़ीट ऊँचा चलता दिखाई दे रहा है। यह लोग अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए किसी भी स्तर तक जाते हुए दिखाई दे रहें हैं। यह बात सिर्फ महाराष्ट्र के नेताओं पर ही लागू नहीं होती है बल्कि उन राजनीतिक दलों पर भी लागू होती है जो मौका परस्ती के चलते सिर्फ अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं। अभी लोकसभा चुनाव ...